मातृ दिवस पर मां के लिए 10 बेस्ट कवितायेँ | Mothers Day Poems in Hindi (2027)

Mothers Day Poems in Hindi: Mother’s Day is really not about us, but about our mothers. It’s a day when we should celebrate our moms. This day is not for everyone who is a mother, but for everyone who has a mother.

Whether you have your own child or not, if you focus more on giving respect than receiving it, you will have love, making it the most fulfilling Mother’s Day. She carried you in her womb for 9 months and raised you to be a good child who deserves respect. To make them feel special, you can write a poem about your mom in Hindi on Mother’s Day and dedicate it to her.

If you’re not good at writing poems, you can use Happy Mother’s Day poems in Hindi, which are easily available on the internet. In this article, we have included emotional poems about mothers in Hindi, poem on mothers day in Hindi, poem for mother’s day, mother’s day kavita in Hindi, poems dedicated to mothers in Hindi, and poems about a mother’s love in Hindi.

Mothers Day Poems in Hindi | मातृ दिवस पर मां के लिए 10 बेस्ट कवितायेँ

Mothers Day Poems in Hindi

1. जैसी मेरी माँ है (मातृ दिवस कविता)

धुप में छाया जैसे,

प्यास में दरिया जैसे,

तन में जीवन जैसे,

मन में दर्पण जैसे,

हाथ दुआओं वाले रोशन करे उजाले,

फूल पे जैसे शबनम, सांस में जैसे सरगम,

प्रेम की मूरत दया की सूरत,

ऐसे और कहाँ है ,जैसी मेरी माँ है।

जब भी अँधेरा छा जाये,

वोह दीपक बन जाए,

जब इक अकेली रात सताए,

वोह सपना बन जाए,

अन्दर नीर बहाए,

बाहर से मुस्काए, Mothers Day Poems in Hindi

काया वोह पावन सी,मथुरा-वृन्दावन जैसी,

जिसके दर्शन में हो भगवन,

ऐसी और कहाँ है, जैसी मेरी माँ है

2. ईश्वर का कोई रुप है माँ (Mother’s Day ke Liye Poem)

तुम एक गहरी छाव है अगर तो जिंदगी धूप है माँ

धरा पर कब कहां तुझसा कोई स्वरूप है माँ

अगर ईश्वर कहीं पर है उसे देखा कहां किसने

धरा पर तो तू ही ईश्वर का रूप है माँ, 

ईश्वर का कोई रुप है माँ

नई ऊंचाई सच्ची है नए आधार सच्चा है

कोई चीज ना है सच्ची ना यह संसार सच्चा है

मगर धरती से अंबर तक युगो से लोग कहते हैं

अगर सच्चा है कुछ जग में तो माँ का प्यार सच्चा है

जरा सी देर होने पर सब से पूछती माँ,

पलक झपके बिना घर का दरवाजा ताकती माँ

हर एक आहट पर उसका चौक पड़ना, फिर दुआ देना

मेरे घर लौट आने तक, बराबर जागती है माँ

सुलाने के लिए मुझको, तो खुद ही जागती रही माँ

सहराने देर तक अक्सर, मेरे बैठी रही माँ

मेरे सपनों में परिया फूल तितली भी तभी तक थे।

मुझे आंचल में लेकर अपने लेटी रही माँ।

बड़ी छोटी रकम से घर चलाना जानती थी माँ

कमी थी बड़ी पर खुशियाँ जुटाना जानती थी माँ।

मै खुशहाली में भी रिश्तो में दुरी बना पाया।

गरीबी में भी हर रिश्ता निभाना जानती थी माँ।

– दिनेश रघुवंशी

3. मां जो रूठे तो जग रूठ जाए (Mothers Day Poem in Hindi)

चांदनी का शहर, तारों की हर गली,

मां की गोदी में हम घूम आए।

नीला-नीला गगन चूम आए।

पंछियों की तरह पंख अपने न थे,

ऊँचे उड़ने के भी कोई सपने न थे,

मां का आँचल मिला हमको जबसे मगर

हर जलन, हर तपन भूल आए।

दूसरों के लिए सारा संसार था,

पर हमारे लिए मां का ही प्यार था,

सारे नाते हमारे थे मां से जुड़े,

मां जो रूठे तो जग रूठ जाए।

– रमेश तैलंग

4. अपने आंचल की छाओं में (Mother Day Special Poem in Hindi)

अपने आंचल की छाओं में, 

छिपा लेती है हर दुःख से वो 

एक दुआ दे दे तो काम सारे पूरे हों

अदृश्य है भगवान, ऐसा कहते है जो

कहीं ना कहीं एक सत्य से, 

अपरिचित होते है वो

खुद रोकर भी हमें हसाती है वो

हर सलीका हमें सिखलाती है वो

परेशानी हो चाहे जितनी भी, 

हमारे लिए मुस्कुराती है वो

हमारी खुशियों की खातिर दुखो 

को भी गले लगाती है वो

हम निभाएं ना निभाएं 

अपना हर फ़र्ज़ निभाती है वो

हमने देखा जो सपना सच उसे बनती है वो

दुःख के बादल जो छाये हमपर 

तो धुप सी खिल जाती है वो

ज़िन्दगी की हर रेस में 

हमारा होसला बढाती है वो 

हमारी आँखों से पढ़ लेती है 

तकलीफ और उसे मिटाती है वो 

पर अपनी तकलीफ 

कभी नही जताती है वो 

शायद तभी भगवान से भी 

ऊपर आती है वोह 

तब भी त्याग की मूरत 

नही माँ कहलाती है वो

5. माँ तो बस माँ जैसी होती (Mother’s Day Poem in Hindi)

माँ आँखों से ओझल होती

आँखें ढूँढ़ा करती रोती

वो आँखों में स्‍वप्‍न सँजोती

हर दम नींद में जगती सोती

वो मेरी आँखों की ज्‍योति

मैं उसकी आँखों का मोती

कि‍तने आँचल रोज भि‍गोती

वो फि‍र भी ना धीरज खोती

कहता घर मैं हूँ इकलौती

दादी की मैं पहली पोती

माँ की गोदी स्‍वर्ग मनौती

क्‍या होता जो माँ ना होती

नहीं जरा भी हुई कटौती

गंगा बन कर भरी कठौती

बड़ी हुई मैं हँसती रोती

आँख दि‍खाती जो हद खोती

शब्‍द नहीं माँ कैसी होती

माँ तो बस माँ जैसी होती

आज हूँ जो, वो कभी न होती

मेरे संग जो माँ ना होती।

6. जन्नत के धनी वो पैर कभी सहला न सका (Mothers Day Poem in Hindi)

शख्सियत ए लख्ते-जिगर कहला न सका,

जन्नत के धनी वो पैर कभी सहला न सका

दूध पिलाया उसने छाती से निचोड़कर,

मैं ‘निकम्मा’ कभी 1 गिलास पानी पिला न सका

बुढापे का सहारा हूँ अहसास दिला न सका

पेट पर सुलाने वाली को मखमल पर सुला न सका

वो भूखी सो गई बहू के डर से एकबार मांगकर,

मैं सुकुन के दो निवाले उसे खिला न सका

नजरें उन बूढी आंखों से कभी मिला न सका

वो दर्द सहती रही मैं खटिया पर तिलमिला न सका

जो हर रोज ममता के रंग पहनाती रही मुझे

उसे दीवाली पर दो जोड़ी कपड़े सिला न सका

बिमार बिस्तर से उसे शिफा दिला न सका

खर्च के डर से उसे बड़े अस्पताल ले जा न सका

माँ के बेटा कहकर दम तोड़ने के बाद से अब तक सोच रहा हूँ,

दवाई, इतनी भी महंगी न थी कि मैं ला ना सका

7. माँ ही रब है (Mother’s Day Par Poem)

माँ धरती है, माँ ही नभ है

माँ ही रब है, माँ तो सब है

कामों की गठरी कांधे पर लादे

कभी नहीं उफ्फ कहती है

केवल जन्म नहीं देती है

वह जीवन भी देती है

माँ गंगा है, माँ धाय है

माँ गाय है

माँ बच्चों की चिंताओं का

एकमात्र उपाय है

माँ की ममता में देखो

कितना दम है

दुनिया भर की हर उमंग

उसके आगे कम है

ममता की राहों में उसको

कोई बांधा झुका नहीं सकती है

संतान ममता की कीमत

चुका नहीं सकती है

माँ की सेवा कर लोगे

जो तुम सुबह और शाम

घर बैठे ही मिल जाएंगे

तुमको चारों धाम

– पीयूष दत्त मेहता

8. मेरी प्यारी माँ (Mother’s Day Kavita in Hindi)

जब पूरा संसार रुलाता है 

तब माँ याद आती है

दुनिया ने ठुकराया तब 

तेरी याद आती है मेरी प्यारी माँ 

ज़िन्दगी के राहो में मुश्किले आयी 

धुप बारिश में मेहनत की तब याद आयी माँ

जब कोई आधार नहीं मिला 

तब याद आयी है मेरी प्यारी माँ 

प्यार के लिए भागे गलियों में 

तब माँ की ममता की याद आयी माँ

जब पैसा कमाने निकले 

तब मोजशोख कैसे करते है तब याद आयी माँ

ज़िन्दगी ने अपने रंग दिखाए 

सब छोड़के चले गए तब माँ की याद आयी

इसलिए तो माँ तू भगवन 

से भी बड़ा दरजा तेरा है माँ

जब साम को घर आता हु 

तो बच्चे बोले क्या लाये है पापा

माँ बोली बेटा तू कैसा है 

तब माँ की याद आयी है मेरी प्यारी माँ 

जब घर से दूर गया तो पता चला 

की सबसे ज्यादा कॉल माँ के ही आते रहे

तब माँ की याद आती है है मेरी प्यारी माँ 

जब मुशीबत मुझपे गिरती है 

तब माँ ही सबसे ज्यादा रोती है

आंसुओं को पोंछने माँ ही 

दौड़ी आती है है मेरी प्यारी माँ. Mother’s Day Par Poem

9. नींद नहीं आती है तो सुला देती है माँ (मातृ दिवस कविता)

उदास होता हूँ तो हँसा देती है माँ

नींद नहीं आती है तो सुला देती है माँ

मकान को घर बना देती है माँ

खुद भूखी रह कर भी मेरा पेट भरती है माँ

जमीं से शिखर तक साथ देती है माँ

जन्म से आंखरी सांस तक साथ देती है माँ

जिंदगी में मुश्किले चाहे कितनी भी हो

हँस के गुजार लेती है माँ

परिवार छोटा हो या बड़ा सम्भाल लेती है माँ

मेरी आँखों में छुपी हर एक ख्वाइस को पहचान लेती है माँ

मेरे हर दर्द की दवा करती है माँ

मेरी हर खता को माफ़ कर देती है माँ

रिश्तों को जोड़ती है माँ

बिना किसी स्वार्थ के प्यार देती है माँ

परिवार खुश होता है तब खुश होती है माँ

तू चाहे सन्तान ना हो उसकी फिर भी दुलार देती है माँ

– नरेंद्र वर्मा

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10. मां का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता (BEST Mothers Day Poem in Hindi)

मां- मां-मां संवेदना है, भावना है अहसास है

मां- मां जीवन के फूलों में खुशबू का वास है।

मां- मां मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है।

मां- मां रोते हुए बच्चों का खुशनुमा पलना है

मां- मां लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है

मां- मां पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है।

मां- मां आंखों का सिसकता हुआ किनारा है

मां- मां गालों पर पप्पी है, ममता की धारा है।

मां- मां झुलसते दिलों में कोयल की बोली है

मां- मां मेहंदी है, कुमकुम है, सिंदूर है, रोली है।

मां- मां कलम है, दवात है, स्याही है,

मां- मां परमात्मा की स्वयं एक गवाही है।

मां- मां त्याग है, तपस्या है, सेवा है

मां- मां फूंक से ठंडा किया हुआ कलेवा है।

मां- मां अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है

मां- मां जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है।

मां- मां चूड़ी वाले हाथों के मजबूत कंधों का नाम है

मां- मां काशी है, काबा है और चारों धाम है।

मां- मां चिंता है, याद है, हिचकी है

मां- मां बच्चों की चोट पर सिसकी है।

मां- मां चुल्हा-धुंआ-रोटी और हाथों का छाला है

मां- मां जंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है।

मां- मां पृथ्वी है, जगत है, धूरी है

मां- बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है।

तो मां की ये कथा अनादि है

ये अध्याय नहीं है

और मां का जीवन में कोई पर्याय नहीं है।

मां का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता,

और मां जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता।

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